Sachin Pilot ने किसान महापंचायत में हुंकार भरी, सरकार को चेताया

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जयपुर। देश में किसान आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा चाहे दिल्ली हो या पंजाब राजस्थान हो या हरियाणा सभी जगहों पर किसान आंदोलित है और अपने हक की लड़ाई के लिए सभी जगह संघर्षरत हैं। किसानों ने दिल्ली को जोड़ने वाली सभी राजमार्ग को लगभग अस्सी दिनों से बंद कर दिया है जिससे आमजनों को तमाम प्रकार की समस्याओं से दो चार होना पड़ रहा है।

sachin pilot
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इसी सिलसिलें में राजस्थान में भी आज एक किसान महापंचायत का आयोजन किया गया जिसमें कांग्रेस नेता व राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ साथ कांग्रेस के कई विधायक ने भी शिरकत की व इस महापंचायत में हुंकार भरा।

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आपको बता दे की ज़िले के चाकसू उपखंड के कोटखावदा में आज शुक्रवार को पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के नेतृत्व में समर्थित विधायकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा महापंचायत का आयोजन किया गया। इसमें पायलट ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। पायलट के पहुंचने से पूर्व महिलाओं समेत हजारों लोग आयोजन स्थल ओर पहुंचे।

तोरण द्वार बनाकर पायलट का स्वागत किया गया

कार्यक्रम में पायलट के साथ गाड़ियों का काफिला चल रहा था और चाकसू से कोटखावदा में जगह-जगह तोरण द्वार बनाकर पायलट का स्वागत किया। मंच पर पहुंचने से पहले महापंचायत आयोजनकर्ता और चाकसू विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने साफा पहनाकर स्वागत किया। पायलट ने किसान महापंचायत के माध्यम से अपने सम्बोधन में केंद्र को खरी-खोटी सुनाकर अपनी जमीनी पकड़ से हाई कमान तक सन्देश पहुंचाया।

 

आयोजित किसान महापंचायत में सचिन पायलट ने किसानों के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। अपने 15 समर्थक विधायकों के साथ पायलट ने कहा कि किसान को सहानुभूति नहीं, सहयोग चाहिए। केंद्र की तानाशाही के खिलाफ मजबूती से लड़ेंगे। किसान और नौजवान एक साथ खड़े हैं। इसके साथ ही पायलट ने कहा कि किसान सबका है। हम जाति से ऊपर उठकर संघर्ष करेंगे। जाति के नाम पर किसानों को बांटने की साजिश चल रही है।

केंद्र को तीनों कानून वापस लेने ही पड़ेंगे-पायलट

दिल्ली में बैरीकेड लगा दिए, कीलें लगा दीं। हम भी मानने वाले नहीं हैं। केंद्र को तीनों कानून वापस लेने ही पड़ेंगे। जब तक केंद्र तीनों कानूनों को वापस नहीं लेती है तब तक गांधी वादी तरीके से हमारा संघर्ष जारी रहेगा। जुलाई में पायलट का साथ छोड़ने वाले प्रशांत बैरवा भी महापंचायत के मंच पर पहुंचे। इस दौरान पायलट समर्थकों ने हूटिंग शुरू कर दी हालांकि बाद में उन्हें शांत करवाया गया।

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प्रशांत बैरवा सात महीने बाद पायलट के किसी कार्यक्रम में पहुंचे हैं। प्रशांत बैरवा पहले सचिन पायलट के ही साथ थे लेकिन जुलाई में बगावत के वक्त गहलोत खेमे में चले गए थे। बाड़ेबंदी में भी गहलोत के साथ थे। सबसे बड़ा सवाल ये कि क्या प्रशांत बैरवा गहलोत खेमे को छोड़कर वापस पायलट खेमे में आ गए हैं। कार्यक्रम के अंत मे सचिन पायलट ने अपने पिता और किसान नेता स्व। राजेश पायलट की मूर्ति का भी अनावरण किया।

 

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