Farm bill के समर्थन नें आया ये किसान संगठन, कही ऐसी बात

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जयपुर। देश में खेती बिल को लेकर मचे महासंग्राम में भाजपा समर्थित इंडियन किसान यूनियन ने सरकार के पक्ष में मोर्चा खोला है और कहा की मोदी सरकार को किसी भी कीमत पर तीनों कृषि बिल को वापस नही लेना चाहिए। इन तीनों बिल को किसान समझन नहीं रहे हैं इसी कारण विरोध कर रहे हैं। मोदी सरकार के द्वारा लाए गए कृषि बिल किसान के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा और खेती की दशा औऱ दिशा को सुधारने का काम करेगा।

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Indian Farmer Plowing in cotton field

. पहला एपीएमसी एक्ट को खत्म कर सरकार निजी क्षेत्र को लोगों को भी कृषि से जुड़ने का काम किया है और जिससे किसानों को उनके उपज का बेहतर दाम मिल सके।
. दूसरा कांट्रेक्ट फार्मिंग- इससे बड़े-बड़े उद्योगपति किसानों के जमीन को लीज पर लेकर खेती करेंगे व किसान को एक निश्चित राशि खेत के रकबा के अनुसार देंगे
.एमएसपी की बाध्यता खत्म करने का प्रावधान है जिसमें किसान अपने उपज का एमएसपी से ज्यादा दाम पर भी बेच सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट किसान संगठनों की तथकथित ट्रैक्टर रैली पर तत्काल रोक लगाएं

आपको बता दें की इंडियन किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकुमार वालिया ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट किसान संगठनों की तथकथित ट्रैक्टर रैली पर तत्काल रोक लगाएं। साथ ही केंद्र सरकार से आग्रह है कि वो किसी भी दबाव में कृषि कानूनों को वापस ना लें। वहीं, किसान अपनी हठधर्मिता छोड़कर कानून के प्रभावों को देखने के लिए सरकार को कुछ समय दें।

किसानों की दिल्ली में प्रस्तावित ट्रैक्टर पर तत्काल बैन लगाएं supreme court

इंडियन किसान यूनियन का विस्तार देने के लिए जयपुर आए वालिया ने पत्रकार वार्ता में कहा कि केंद्र सरकार बिल को पूर्ण रूप से लागू करें, किसी के दबाव में आकर इसे वापस नहीं लें। ये किसानों का हित करने वाला बिल है। वालिया ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया की किसानों की दिल्ली में प्रस्तावित ट्रैक्टर पर तत्काल बैन लगाएं।

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यदि गणतंत्र दिवस पर रैली निकलती है तो टकराव की स्थिती बनेगी। ऐसे में इस पर तुरंत रोक लगा दी जानी चाहिए। वालिया ने कहा कि आज हिंदुस्तान में धर्म संकट खड़ा हो गया है एक तरफ तो सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुचांने की कोशिश है। लोग सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं मान रहे हैं। वहीं, किसान सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी को मानने से इनकार कर रहे हैं।

 

ऐसे में केंद्र सरकार तत्काल समन्वय समिति बनाए किसानों, आधिकारियों और कमेटी से बात करें। वालिया ने कहा कि आज हिंदुस्तान की जनता इस आंदोलन से तंग आ चुकी है। एक तरफ तो देश में कोरोना की मार चल रही है, इस समय में जब देश को मदद की जरूरत है। ऐसे में अपनी सरकार के खिलाफ आंदोलन कतई सही नहीं है।

मोदी सरकार आम जनमानस की सरकार है-वालिया

वालिया ने कहा कि यह सरकार आम जनमानस की सरकार है इस पर भरोसा करना चाहिए। यह आपका और जन मानस का भी भला करने वाली है। सरकार ने बातचीत के दरवाजे खोले हैं। आपको जिन जिन मुद्दों पर संदेह है तो हम खुले मन से बात रखने को तैयार हैं। जिन नेताओं की जमीन खिसक चुकी है उनकी बातों में नहीं आकर सरकार पर भरोसा करें।

65 सालों के बाद भी किसानों की दशा वही की वही है-किसान यूनियन

वालिया ने कहा कि आजादी के 65 साल बाद भी किसानों की दशा वही की वही है। मैं खुद किसान का बेटा हूं आज हमारी नई पीढ़ी खेती नहीं करना चाहती है। खेती फायदे का सौदा नहीं है। सरकार को एक साल का समय दें किसी के बहकावे में नहीं आए। मोदी की लोकप्रियता और भाजपा जनाधार बढ़ने के कारण ये लोग घबराकर किसानों को बरगलाने का काम कर रहे हैं। किसान सरकार की मंशा को समझें, सरकार किसान की दशा दिशा को सुधार करना चाहती है। आंदोलन को जारी रखने से पहले इन कानूनों को पढ़ लें।

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वालिया ने कहा कि जिस आदमी को विश्व के सबसे ज्यादा लोगों ने पसंद किया। कोरोनाकाल के दौरान विश्व में पीएम मोदी को सबसे ज्यादा पसंद किया गया। ऐसे में वो किसानों का नुकसान करेंगे। किसानों को अपना आंदोलन समाप्त कर कुछ समय नए कानून के लिए दें। भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष हरिराम रणवां ने कहा कि किसान तार्किक रूप से चर्चा करे तो सरकार सहमत है। किसानों को जिद छोड़कर राजनीति दलों के प्रभाव को छोड़कर वास्तविकता के साथ बिलों को समझना होगा।

 

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